शतरंज के दिग्गजों की घर वापसी
जब 2022 में पूर्ण पैमाने पर युद्ध शुरू हुआ, तो यूक्रेन का शतरंज परिदृश्य बिखर गया। कई खिलाड़ी देश छोड़कर चले गए, और नेतृत्व बदल गया। ऐसे निराशाजनक माहौल में, शतरंज महासंघ ने दो अनुभवी ग्रैंडमास्टर्स – अलेक्जेंडर बेलियाव्स्की और एड्रियन मिखालचिशिन – से संपर्क किया। बेलियाव्स्की, जिन्होंने दशकों तक यूक्रेन का प्रतिनिधित्व किया था, और मिखालचिशिन, जिन्होंने 1969 से देश की सेवा की थी, दोनों के लिए यह एक `नैतिक दायित्व` था कि वे युद्ध के समय वापस लौटकर टीम को संभालें।
मिखालचिशिन ने स्वीकार किया कि यह जीत अप्रत्याशित थी। यूक्रेन ने पहले भी ओलंपियाड जीते हैं, लेकिन हाल के वर्षों में यूरोपीय चैंपियनशिप में परिणाम सामान्य रहे थे। 2025 में वाइस प्रेसिडेंट वलोडिमिर कोवलचुक के प्रयास से धन की उचित व्यवस्था होने के बाद ही टीम को एकजुट करने का काम शुरू हो सका।
कोचिंग की रणनीति: अत्यधिक विश्लेषण पर लगाम और ताज़ी हवा
पुरुष टीम के लिए कोचिंग की जिम्मेदारियाँ दोनों दिग्गजों ने बाँट ली थीं।
- अलेक्जेंडर बेलियाव्स्की (कप्तान): उनका मुख्य काम हर राउंड के लिए लाइन-अप जमा करना, ड्रॉ के प्रस्तावों का मूल्यांकन करना और मैच प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करना था। वह हर शाम महत्वपूर्ण टीम बैठकों का नेतृत्व करते थे, जिसमें प्रतिद्वंद्वी टीमों के विश्लेषण और अगले राउंड के लिए रणनीतियाँ तय की जाती थीं।
- एड्रियन मिखालचिशिन (ट्रेनर): उनकी भूमिका अधिक व्यक्तिगत थी। उन्हें ग्रैंडमास्टर आंद्रेई वोलोकितिन की तैयारी को `सीमित` करना पड़ा। मिखालचिशिन ने इरोनी के साथ बताया, “वह बहुत गहराई में जाते हैं। उनका विश्लेषण हमेशा 40 चालों तक लंबा होता है!” इसके अलावा, मिखालचिशिन ने खिलाड़ियों को स्वस्थ रखने के लिए रोज एक घंटे की वॉक (`टैंकिंग ऑक्सीजन`, जैसा कि बोटविनिक ने सलाह दी थी) का नेतृत्व किया। यह साझा समय टीम के मनोबल को मजबूत करने में सहायक था।
विजय के सूत्रधार: नए चेहरे और अनुभवी दीवार
बुडापेस्ट ओलंपियाड में साधारण प्रदर्शन के बाद, टीम को नई ऊर्जा की सख्त जरूरत थी। टीम में इहोर कोवलेंको और इहोर समुनेंकोव का चयन महत्वपूर्ण साबित हुआ। कोवलेंको तीन साल तक सेना में रहने के बाद लौटे थे, जबकि समुनेंकोव युवा प्रतिभा थे।
कप्तान ने इवांचुक को बोर्ड वन की भारी जिम्मेदारी देने से मना कर दिया, क्योंकि 56 साल की उम्र में तनावपूर्ण आयोजनों में यह बहुत बड़ी मांग होती है। रणनीति स्पष्ट थी:
- बोर्ड वन पर पोन्नोमोरियोव मजबूत खिलाड़ियों को बेअसर (न्यूट्रलाइज) करेंगे (उन्होंने सभी गेम ड्रॉ किए)।
- वोलोकितिन और कोरोबोव बोर्ड दो को मजबूत करेंगे।
- जीत के लिए युवा समनेंकोव और अनुभवी कोवलेंको पर निर्भरता रखी गई। (दोनों `इगोर` ने शानदार प्रदर्शन किया)।
बेलियाव्स्की ने जोर दिया कि टीम भावना ही असली जीत थी। 9वीं वरीयता प्राप्त होने के बावजूद, उन्होंने उच्च रैंक वाली टीमों के खिलाफ लगातार जीत हासिल की। उन्होंने विश्व चैंपियन टाइग्रान पेट्रोसियन की सलाह को याद किया: “आराम करो और आनंद लो। मैंने वर्ल्ड चैंपियन ऐसे ही बना था।”
युद्ध का क्रूर यथार्थ और शतरंज का भविष्य
शतरंज की यह विजय उस भयानक पृष्ठभूमि में हुई है, जहाँ जीवन हर दिन जोखिम से भरा है। कोचों ने यूक्रेन में मौजूदा स्थिति का कड़वा सच बयां किया:
- दैनिक जीवन पर असर: हवाई हमले के अलर्ट (Air-raid alerts) अब दिनचर्या का हिस्सा हैं। बिजली की कटौती (ब्लैकआउट) 12 घंटे से अधिक होती है, और बच्चे कभी-कभी मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ते हैं।
- खिलाड़ियों का बलिदान: कोवलेंको ने तीन साल युद्ध के मैदान में बिताए और “साहस के लिए” पदक प्राप्त किया। दुखद रूप से, व्यापक शतरंज समुदाय (ट्रेनर्स और जूनियर सहित) के 40 से 50 सदस्य रूस के हमलों में मारे गए हैं। मिखालचिशिन ने कहा कि जो लोग दावा करते हैं कि खेल “राजनीति से बाहर” है, वे इस त्रासदी को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।
- टूर्नामेंटों का गायब होना: अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट लगभग खत्म हो चुके हैं क्योंकि विदेशी खिलाड़ी यूक्रेन आने से डरते हैं। स्पॉन्सरशिप अब जूनियर इवेंट्स और स्थानीय त्योहारों तक सिमट गई है।
यहां तक कि खार्किव और निप्रो—जो लगभग अग्रिम पंक्ति पर हैं—वहाँ भी छोटे शतरंज कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। यह बताता है कि शतरंज सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि यूक्रेन की राष्ट्रीय पहचान का एक दृढ़ हिस्सा है।
निष्कर्ष: पदक और “विजेता की स्मृति”
महिला टीम ने पोलैंड को हराकर भी रजत पदक ही हासिल किया, क्योंकि कुछ ड्रॉ ने उन्हें स्वर्ण से वंचित कर दिया, लेकिन पुरुष टीम की जीत ने पूरे देश को गौरवान्वित किया।
मिखालचिशिन ने कहा कि जिन खिलाड़ियों ने पहले बड़े टीम इवेंट जीते हैं, उनके पास एक “विजेता की स्मृति” (winner`s memory) होती है। जब वे एक साथ खेलते हैं, तो यह मानसिकता सब कुछ बदल देती है।
इस जीत के बाद टीम को राज्य नेताओं से मिलने और राज्य पदकों के लिए नामित किए जाने की योजना है। यह दर्शाता है कि युद्ध के समय में, खेल में मिली सफलता राष्ट्रीय मनोबल बढ़ाने के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। कोचों की एकमात्र आशा यही है कि यूरोप यूक्रेन का समर्थन जारी रखे और रूस के संसाधन जल्द ही समाप्त हों ताकि देश में शांति लौट सके।
