थाईलैंड में ब्राजील का कांस्य धमाका: जापान को पांच-सेट के रोमांचक मुकाबले में हराकर किया तीसरा स्थान पक्का!

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बैंकॉक, थाईलैंड – 2025 FIVB महिला वॉलीबॉल विश्व चैंपियनशिप का मंच सजा था, और हर खेल प्रेमी की निगाहें पोडियम के अंतिम स्थान पर टिकी थीं। सेमीफाइनल में इटली से एक कड़े मुकाबले में हारने के बाद, दक्षिण अमेरिकी दिग्गज ब्राजील ने अपने आत्मबल को समेटा और जापान के खिलाफ कांस्य पदक के लिए एक यादगार भिड़ंत में जीत दर्ज कर तीसरा स्थान हासिल किया। यह सिर्फ एक मैच नहीं था, यह दृढ़ संकल्प, रणनीति और इस्पाती इरादों की एक महागाथा थी जिसने दर्शकों को अपनी सीटों से बांधे रखा।

एक ऐसी टक्कर, जिसे भुला पाना मुश्किल

हुआमार्क इंडोर स्टेडियम, बैंकॉक में खेले गए इस मुकाबले ने चैंपियनशिप के अंतिम दिन की शुरुआत ही जोरदार की। ब्राजील और जापान, दोनों ही टीमें अपनी हार का दर्द भुलाकर सम्मान और पदक के लिए लड़ रही थीं। परिणाम? एक रोमांचक पांच-सेट की लड़ाई जो 3-2 (25-12, 25-17, 19-25, 27-29, 18-16) के स्कोर पर ब्राजील के पक्ष में समाप्त हुई। यह जीत केवल स्कोरलाइन नहीं थी, बल्कि हर एक अंक के लिए लड़ी गई ज़बरदस्त जंग का प्रतीक थी। पहले दो सेटों में ब्राजील का दबदबा देखकर लगा कि मैच एकतरफा होगा, लेकिन जापानी टीम ने हार मानने से इनकार कर दिया और अगले दो सेट जीतकर मुकाबले को निर्णायक पांचवें सेट तक खींच लिया। क्या यह खेल की आत्मा नहीं है, जहां कोई भी टीम अंतिम सीटी बजने तक हार नहीं मानती?

गाबी बनाम सातो: सितारों की भिड़ंत

ब्राजील की कप्तान गैब्रिएला `गाबी` गुइमारेस इस मैच की असली नायिका बनकर उभरीं। सेमीफाइनल में इटली के खिलाफ 29 अंकों का शानदार प्रदर्शन करने के ठीक एक दिन बाद, गाबी ने जापान के खिलाफ 35 अंक (33 किल्स, एक ब्लॉक, एक ऐस) बनाकर अपनी क्लास साबित की। ऐसा लगता था जैसे गाबी ने पोडियम पर कदम रखने का प्रण ले लिया था और कोई भी उन्हें रोक नहीं सकता था। उनके शब्दों में, “हम इसके हकदार थे। हम थाईलैंड से पदक जीते बिना नहीं जा सकते थे।” यह बात उनके हर शॉट, हर बचाव में साफ दिख रही थी।

लेकिन जापानी टीम ने भी अपनी छाप छोड़ी। जापान की बाहरी हिटर योशिनो सातो ने अपनी टीम के लिए अविश्वसनीय 34 अंक (29 किल्स, तीन ऐस, दो ब्लॉक) बटोरे, जो गाबी के प्रदर्शन को कड़ी टक्कर दे रहे थे। कप्तान मायु इचिकावा ने 23 किल्स और युकीको वाडा ने 13 अंक जोड़कर मैच को और भी दिलचस्प बना दिया। यह दो एशियाई दिग्गजों का अद्भुत प्रदर्शन था, जिसने खेल प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

रणनीति और आंकड़ों का खेल

इस जीत में ब्राजील के लिए ब्लॉकिंग एक महत्वपूर्ण कारक साबित हुई। उन्होंने ब्लॉकिंग में जापान को 15-6 से मात दी, जो एक निर्णायक अंतर था। हालांकि, जापान ने अपनी आक्रामक खेल शैली से 75 किल्स किए, जबकि ब्राजील के 68 किल्स थे। लेकिन खेल में गलतियों का भी अपना महत्व होता है, और जापान ने ब्राजील के 13 के मुकाबले 26 गलतियां करके यह अंतर पैदा कर दिया। दोनों टीमों ने पांच-पांच ऐस लगाए, जो दिखाता है कि सेवा में भी दोनों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा थी। अंततः, यह छोटी-छोटी रणनीतिक बढ़त और कम गलतियों ने ब्राजील को जीत की ओर धकेला। कभी-कभी, `कम गलती करना` भी एक बड़ी रणनीति होती है!

संकट से उबरने का जश्न

यह जीत ब्राजील के लिए सिर्फ एक कांस्य पदक नहीं, बल्कि सेमीफाइनल की हार के सदमे से उबरने और अपनी स्वतंत्रता दिवस पर देश को गौरवान्वित करने का एक तरीका भी था। 18 विश्व चैंपियनशिप प्रदर्शनों में यह उनका छठा पदक है, जिसमें चार रजत (1994, 2006, 2010, 2022) और अब दो कांस्य (2014, 2025) शामिल हैं। यह उनकी खेल विरासत में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है, जो यह दर्शाता है कि ब्राजील की महिला वॉलीबॉल टीम कितनी लचीली और दृढ़ है।

जहां तुर्की और इटली ने चैंपियनशिप के फाइनल में अपनी किस्मत आजमाई, वहीं ब्राजील और जापान के बीच हुए इस `छोटे` मैच ने शायद सबसे अधिक ड्रामा और रोमांच पेश किया। यह साबित करता है कि हर पदक, चाहे वह स्वर्ण हो या कांस्य, अपने आप में एक कहानी समेटे होता है – संघर्ष की, जीत की, और अटूट खेल भावना की।

धीरज मेहता

धीरज मेहता नई दिल्ली के एक खेल पत्रकार हैं जिन्हें बारह साल का अनुभव है। कबड्डी की स्थानीय प्रतियोगिताओं की कवरेज से शुरुआत करने वाले धीरज अब क्रिकेट, फुटबॉल और फील्ड हॉकी पर लिखते हैं। उनके लेख रणनीतिक विश्लेषण में गहराई से जाने के लिए जाने जाते हैं। वे एक साप्ताहिक खेल कॉलम लिखते हैं और लोकप्रिय खेल पोर्टल्स के साथ सक्रिय रूप से काम करते हैं।