जब महिला टेनिस की वर्तमान विश्व नंबर 1 खिलाड़ी, बेलारूस की आर्यना सबालेंका, कोर्ट पर पुरुषों के खेल की अनियंत्रित गति का सामना करती हैं, तो यह सिर्फ एक प्रदर्शनी मैच नहीं रह जाता—यह एथलेटिक क्षमताओं और पेशेवर प्रशिक्षण की एक गंभीर प्रयोगशाला बन जाता है। हाल ही में हुए एक `बैटल ऑफ जेंडर्स` मैच में, सबालेंका का सामना ऑस्ट्रेलियाई सनसनी निक किर्गियोस से हुआ, और नतीजा, 6-3, 6-3 से किर्गियोस के पक्ष में रहा। हालांकि स्कोरलाइन एकतरफा लग सकती है, सबालेंका के लिए यह हार नहीं, बल्कि आगामी सीज़न के लिए सबसे मूल्यवान प्रशिक्षण सत्रों में से एक थी।
सबालेंका ने मैच के बाद स्पष्ट किया, `पुरुष के खिलाफ खेलना पूरी तरह से एक अलग टेनिस है: सब कुछ कहीं ज़्यादा तेज़ी से होता है।`
कोर्ट पर `अदृश्य दीवार`: गति और प्रतिक्रिया का अंतर
सबालेंका दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिला खिलाड़ियों में से एक हैं। उनकी सर्विस और ग्राउंडस्ट्रोक की गति अक्सर कई एटीपी टूर खिलाड़ियों को भी चुनौती देती है। लेकिन जब वह एक शीर्ष पुरुष खिलाड़ी जैसे किर्गियोस का सामना करती हैं, जिनकी सर्विस की गति 220 किमी/घंटा को पार कर सकती है, तो खेल का आयाम पूरी तरह से बदल जाता है।
टेनिस विशेषज्ञ हमेशा इस बात पर ज़ोर देते हैं कि पुरुष और महिला टेनिस के बीच मूलभूत अंतर केवल ताकत का नहीं, बल्कि गति और स्पिन् (Spin) का है। पुरुषों के कोर्ट पर बॉल ज़्यादा तेज़ गति से आती है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण, वह ज़्यादा गति से वापस लौटती है। प्रतिक्रिया के लिए उपलब्ध समय (Reaction Time) अत्यंत कम हो जाता है। सबालेंका को न केवल तेज गति का सामना करना पड़ा, बल्कि उन्हें कोर्ट की बदलती परिस्थितियों और किर्गियोस के अपरंपरागत खेल के अनुकूल भी होना पड़ा।
एक महंगी लेकिन आवश्यक `फिजिकल कसरत`
एक प्रदर्शनी मैच का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों को सीज़न के लिए तैयार करना होता है। किसी भी प्रशिक्षण अभ्यास में, खिलाड़ी कभी भी उस तीव्रता और दबाव को दोहरा नहीं सकता जो उन्हें एक वास्तविक मैच में मिलती है। और जब आप निक किर्गियोस जैसे प्रतिभा-सम्पन्न और अप्रत्याशित खिलाड़ी के विरुद्ध खेलते हैं—भले ही वह मज़े के लिए खेल रहे हों—तो आप शारीरिक और मानसिक रूप से अपनी सीमाओं तक पहुँच जाते हैं।
सबालेंका ने इस मुकाबले को एक `उत्कृष्ट शारीरिक कसरत` बताया। यह टिप्पणी एक तरह से पेशेवर इरोनी (irony) भी है। वह जानती थीं कि जीतने की संभावना कम थी, लेकिन इस हाई-ऑक्टेन मैच में अपने शरीर को उस चरम तनाव से गुज़ारना, जो उन्हें अगले बड़े टूर्नामेंट में शीर्ष प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ़ मिलेगा, अमूल्य है। यह दो सेट की हार उनके फिटनेस ट्रेनर को हफ़्तों के अभ्यास से ज़्यादा जानकारी दे गई होगी।
नए सीज़न के लिए तैयार: आत्मविश्वास की कुंजी
शीर्ष स्तर के एथलीटों के लिए, हार का मतलब तैयारी में कमी नहीं होता। सबालेंका ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद, वह खुद को नए सीज़न के लिए लगभग तैयार महसूस कर रही हैं। पुरुष खिलाड़ी के खिलाफ़ गति और शक्ति का सामना करने के बाद, जब वह वापस डब्ल्यूटीए टूर पर आएंगी, तो गेंद की गति उन्हें धीमी महसूस हो सकती है—यह एक मनोवैज्ञानिक बढ़त है।
सबालेंका की यह स्वीकारोक्ति कि पुरुषों के खेल की गति अलग है, न केवल उनकी व्यावसायिकता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि वह हमेशा अपनी खेल क्षमता को बढ़ाने के लिए तैयार रहती हैं। उन्होंने वादा किया है कि वह पूरे वर्ष `शानदार टेनिस` का प्रदर्शन करेंगी और प्रशंसकों को खुशी देंगी। और यदि किर्गियोस जैसे खिलाड़ियों के साथ दो सेट खेलना उनकी तैयारी का हिस्सा है, तो महिला टेनिस में उनकी आने वाली सफलता निश्चित रूप से रोमांचक होगी।
