अंतर्राष्ट्रीय शतरंज महासंघ (FIDE) द्वारा हाल ही में कास्टो अबुंडो के निधन की घोषणा वैश्विक शतरंज समुदाय के लिए एक गहरा सदमा है। अबुंडो ने दशकों तक महाद्वीपीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर शतरंज को बढ़ावा देने के लिए अथक प्रयास किए। उनकी कहानी केवल टूर्नामेंट आयोजित करने या पदों पर रहने की नहीं है; यह खेल की जटिल राजनीति को कुशलता से नेविगेट करने और एक ऐसे संगठन को खड़ा करने की है जो आज एशिया में लाखों खिलाड़ियों को प्रेरित करता है।
एशियाई शतरंज के वास्तुकार
अबुंडो का करियर 1978 में अंतर्राष्ट्रीय आर्बिटर बनने के साथ शुरू हुआ। जल्द ही, उनकी संगठनात्मक क्षमता ने उन्हें FIDE के शीर्ष पर पहुंचा दिया, जहाँ उन्होंने 1988 से 1990 तक FIDE सचिव के रूप में कार्य किया। लेकिन उनके कौशल का असली प्रदर्शन बड़े आयोजनों में हुआ। 1992 में मनीला में शतरंज ओलंपियाड हो, 2000 की विश्व चैम्पियनशिप हो या 2001 का विश्व कप—इन सभी आयोजनों में उनकी भूमिका निदेशक और मुख्य आर्बिटर की रही।
यदि FIDE ने उन्हें वैश्विक पहचान दी, तो एशियाई शतरंज महासंघ (ACF) ने उन्हें विरासत बनाने का मंच दिया। 2006 से 2014 तक उपाध्यक्ष और फिर कार्यकारी निदेशक के रूप में, उन्होंने ACF के संस्थागत ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह वह दौर था जब एशियाई देशों में शतरंज की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही थी, और अबुंडो ने सुनिश्चित किया कि यह वृद्धि संगठित और टिकाऊ हो।
कैंपोमैनेस युग की अप्रत्याशित कार्यशैली
कास्टो अबुंडो का सबसे महत्वपूर्ण पेशेवर संबंध FIDE के विवादास्पद लेकिन प्रभावशाली अध्यक्ष फ्लोरेंसियो कैंपोमैनेस के साथ था। अबुंडो ने खुद स्वीकार किया था कि उन्होंने अपने पिता की तुलना में कैंपोमैनेस के साथ अधिक समय बिताया। यह एक ऐसा युग था जब आधुनिक संचार माध्यमों का अभाव था।
प्रशासकीय चुनौतियों के बीच, अबुंडो ने शतरंज के स्वरूप में एक तकनीकी बदलाव का प्रस्ताव रखा: विश्व कप नॉकआउट प्रणाली (World Cup knockout system)। यह पहल तब आई जब कुछ बड़े खिलाड़ियों (जिन्हें उन्होंने `प्राइमा डोना` कहा) द्वारा मैच से हटने की धमकी देने से आयोजक मुश्किल में पड़ जाते थे। नॉकआउट प्रारूप ने टूर्नामेंट को अधिक गतिशील और विश्वसनीय बना दिया, जिससे आयोजकों को खिलाड़ियों की मनमानी पर कम निर्भर रहना पड़ा। यह तकनीकी समाधान आज भी विश्व चैंपियनशिप चक्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बॉबी फिशर के साथ एक महीना: सबसे रोचक अध्याय
अबुंडो के जीवन का एक ऐसा अध्याय है जो शतरंज इतिहास के सबसे गूढ़ व्यक्ति से जुड़ा है: ग्रैंडमास्टर बॉबी फिशर। 1976 में, जब कैंपोमैनेस, अनातोली कारपोव के साथ फिशर का बहुप्रतीक्षित मैच फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहे थे, तब फिशर फिलीपींस आए थे। कास्टो अबुंडो को एक महीने तक फिशर के साथ रहने का जिम्मा सौंपा गया था।
यह काम किसी भी शतरंज प्रशासक के लिए `सामान्य` से बहुत दूर था। अबुंडो ने फिशर के साथ रैकेटबॉल खेला, खुले समुद्र में दूर तक तैराकी की और रात में लंबी सैर पर शतरंज पर चर्चा की। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि उन्हें फिशर के लिए फिलीपीनी राष्ट्रीय शतरंज टीम की एक सदस्य के साथ डेट भी आयोजित करनी पड़ी थी, जिसे फिशर पसंद करते थे। इसके अलावा, अबुंडो को उन्हें राष्ट्रपति मार्कोस की नौका तक ले जाना पड़ता था और हर रात फिशर को `चेस इन्फॉर्मेंट` (Chess Informant) से गेम दोहराते हुए देखना पड़ता था।
यह कहानी न केवल अबुंडो के धैर्य और बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि शतरंज के पर्दे के पीछे किस तरह के असाधारण और व्यक्तिगत प्रयास किए जाते थे, ताकि खेल की सबसे बड़ी हस्तियों को संभाला जा सके। यह अनुभव दर्शाता है कि अबुंडो केवल नियमों के रखवाले नहीं थे; वह एक कुशल `समस्या समाधानकर्ता` थे, भले ही समस्या शतरंज के बोर्ड के बाहर क्यों न हो।
विरासत और सम्मान
कास्टो अबुंडो को उनके दूरदर्शी नेतृत्व और राष्ट्रीय महासंघों को एकजुट करने की दुर्लभ क्षमता के लिए जाना जाता था। उन्होंने हमेशा आपसी सम्मान और साझा उद्देश्य की भावना को बढ़ावा दिया। उनके निधन पर FIDE और एशियाई शतरंज महासंघ ने उनके परिवार, सहयोगियों और प्रियजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
अबुंडो का पेशेवर और मानवीय योगदान एक ऐसी विरासत है, जिसे गहराई से संजोया जाएगा। उन्होंने एक मजबूत नींव रखी है, जिस पर आने वाले वर्षों में एशियाई शतरंज का विकास होता रहेगा। शतरंज की बिसात बिछाने वाले इस गुमनाम नायक की यादें निश्चित रूप से खेल को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहेंगी।
