फ़ुटबॉल के दुनिया में, जहां हर टीम का सपना विश्व कप में अपनी जगह बनाना होता है, वहीं कुछ टीमों के लिए यह सफर अक्सर `अगर मगर` के समीकरणों से भरा होता है। इटली की राष्ट्रीय टीम भी ऐसी ही एक स्थिति में फंसी हुई है, जहां विश्व कप 2025 के लिए सीधी योग्यता का मार्ग अब लगभग बंद हो चुका है और उनकी उम्मीदें प्लेऑफ के जटिल रास्ते पर टिकी हैं। यह स्थिति इटली के प्रशंसकों के लिए कोई नई बात नहीं है, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में अपनी टीम को कई बार इसी तरह की चुनौतियों का सामना करते देखा है।

नॉर्वे का शानदार प्रदर्शन: इटली की सीधी योग्यता पर लगा विराम
हालिया मुकाबलों में नॉर्वे ने इजरायल को 5-0 से हराकर अपने ग्रुप में अपनी स्थिति को बेहद मजबूत कर लिया है। उनके इस दमदार प्रदर्शन और प्रभावशाली गोल अंतर (+26, इटली के +7 के मुकाबले) ने उन्हें सीधी विश्व कप योग्यता के करीब पहुंचा दिया है। इसका सीधा परिणाम यह हुआ है कि इटली, जिसे हमेशा एक प्रबल दावेदार माना जाता रहा है, अब सीधी योग्यता की दौड़ से बाहर हो गया है और उसे अब दूसरे विकल्प पर विचार करना होगा। यह खेल की क्रूरता ही है कि एक पल में समीकरण कैसे बदल जाते हैं।
प्लेऑफ की डगर: इटली का एकमात्र यथार्थवादी मार्ग
कोच गैट्टूसो की टीम के लिए अब सबसे यथार्थवादी लक्ष्य अपने ग्रुप में दूसरा स्थान हासिल करना है। दूसरा स्थान उन्हें प्लेऑफ में प्रवेश दिलाएगा, जहां उन्हें अन्य टीमों के खिलाफ दो-लेग के मुकाबले खेलकर विश्व कप का टिकट जीतना होगा। अच्छी बात यह है कि दूसरा स्थान हासिल करने पर भी इटली प्लेऑफ में शीर्ष वरीयता प्राप्त टीम के रूप में प्रवेश कर सकती है, जिससे उनकी राह थोड़ी आसान हो सकती है। लेकिन इस `थोड़ी आसानी` तक पहुंचने के लिए भी उन्हें अब हर कदम फूंक-फूंक कर रखना होगा।
निर्णायक मुकाबले: इजरायल और उससे आगे की चुनौतियाँ
इटली के लिए अब आगामी मैच बेहद महत्वपूर्ण हैं। मंगलवार, 14 अक्टूबर को उदाइन के ब्लूएनर्जी स्टेडियम में इजरायल के खिलाफ होने वाला मुकाबला सबसे अहम है। यह मैच इटली के लिए `करो या मरो` की स्थिति है:
- जीत की अनिवार्यता: यदि इटली इस मैच में जीत दर्ज करता है, तो वे गणितीय रूप से अपने ग्रुप में दूसरा स्थान पक्का कर लेंगे। यह उन्हें सीधे प्लेऑफ में पहुंचाएगा, जहां से वे विश्व कप के लिए जोर लगाएंगे।
- ड्रॉ या हार की स्थिति: यदि इजरायल के खिलाफ मैच ड्रॉ होता है या इटली हार जाता है, तो उन्हें प्लेऑफ में अपनी जगह बनाने के लिए नवंबर में होने वाले अपने शेष दो मैचों में कम से कम एक अंक हासिल करना होगा। ये मैच 13 नवंबर को मोल्दोवा (विदेशी धरती पर) और 16 नवंबर को नॉर्वे (घर पर) के खिलाफ खेले जाएंगे।
कोच गैट्टूसो की रणनीति और खिलाड़ियों की मानसिक दृढ़ता
कोच गैट्टूसो के लिए यह समय टीम को न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी तैयार करने का है। इजरायल के खिलाफ पिछले मैच में 5-4 की रोमांचक लेकिन अस्थिर जीत दिखाती है कि टीम में प्रतिभा तो है, लेकिन स्थिरता की कमी भी है। गैट्टूसो के खिलाड़ियों को यह समझना होगा कि अब हर मैच एक फाइनल जैसा है। युवा खिलाड़ी, जिन्हें कोच ने “सही अर्थों में चैंपियन” बताया है, जैसे कि पीयो, को आगे बढ़कर जिम्मेदारी लेनी होगी। इस स्तर पर कोई भी गलती भारी पड़ सकती है, और टीम पर दबाव बहुत अधिक होगा। प्रशंसकों की उम्मीदों का बोझ भी कम नहीं होगा, जो हर बार इस `अगर-मगर` के खेल से थक चुके हैं।
इटली के फुटबॉल प्रेमियों के लिए यह अगला पड़ाव किसी परीक्षा से कम नहीं है। क्या `अज़ूरी` (इटली की राष्ट्रीय टीम का उपनाम) इन बाधाओं को पार कर एक बार फिर विश्व मंच पर अपनी पहचान बना पाएगा? अगले कुछ हफ्ते यह स्पष्ट कर देंगे कि इटली के फुटबॉल भाग्य में क्या लिखा है।
